Tuesday, June 2, 2020

योग हमें बिमारियों से बचाता हैं। जानिए कैसे ....

हम सभी स्वस्थ रहना चाहते हैं, जिसके लिए हम पौष्टिक भोजन करते हैं, दिनचर्या सही रखते हैं, ख़ुश रहते हैं। इस तरह शरीर और मन को स्वस्थ रखते हैं।

बिमारी (Disease ) क्या हैं:
योग के अनुसार बिमारी का अर्थ हैं शरीर व मन का असंतुलन।साधारणत: हमारा शरीर संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहता हैं। हमारे शरीर में ऐसी प्राकृतिक शक्ति ( healing power) हैं जो सदैव हमें स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने का प्रयास करती हैं। उदाहरणस्वरुप, अगर हमें कही खरोंच आ जाए तो शरीर उसे ठीक करने का कार्य प्रारंभ कर देता हैं। १/२ दिन में वह ज़ख़्म ठीक भी हो जाता हैं।

इसी तरह शरीर के अंदर भी मांसपेशियों की टूटफूट निरंतर होती ही रहती हैं। कोई चोट, संक्रमण,  मांसपेशियों का नष्ट होना और इनकी देखभाल कर ठीक करने ( repair ) की प्रक्रिया लगातार चलती रहती हैं। हमें चाहिए कि इस अंदरूनी हो रही शारीरिक मरम्मत ( repair ) में शरीर को मदद करे। अगर हम अपने शरीर और मन को संतुलित रखेंगे, disturb नहीं होने देंगे तो ये healing जल्दी होगी।

असंतुलन की स्थिति क्यों आती हैं? 
इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

१. मानसिक तनाव, नकारात्मक विचार  पध्दती
२. असंतुलित आहार 
३. अनियमित दिनचर्या
४. सिगरेट, नशा आदि ग़लत आदतें
५. अत्याधिक मेहनत

योग के साथ स्वास्थ्य:
शरीर और मन को संतुलित रखना भी कोई सरल काम नहीं हैं। ऊपर असंतुलन की स्थिती निर्मित करनेवाले ५ कारणों की चर्चा की हैं, उनसे हमें बचना होगा। योग कि विभिन्न तकनीक ( techniques ) हमें यहाँ मदद करती हैं। ये हैं आसन, प्राणायाम, ध्यान, क्रीया, शिथीलीकरण इत्यादि।

जब हम पारंपरिक ( traditional ) योग आसन करते हैं तो ये करने के बाद मन स्थिर और शांत होता हैं, क्योंकि ये आसन श्वास पर ध्यान रखते हुए (breathing pattern, breathing rhythm) के साथ किए जाते हैं। इनको करने से स्नायू मज़बूत होते ही हैं साथ में मन भी शांत होता हैं। मन शांत होने से हमारे Endocrine system संतुलित हो कर कार्य करते हैं। भावनाओं पर संयम आता हैं। धीरे धीरे शरीर के सभी organs की कार्यक्षमता में सुधार होता हैं।

यह पूरी प्रक्रिया इतनी सरल नहीं हैं। इसके लिए ज़रूरी हैं कि हम नियमित रूप से, संयम के साथ योग का अनुसरण करे। किसी workout की तरह जादा exercise कर लेंगे तो जादा लाभ मिलेगा, ऐसा नहीं हैं।

जिनको कुछ शारिरीक समस्या अनुवंशिक रूप से अथवा पहले से हैं वे भी योग का अनुसरण करके अपनी बीमारी को नियंत्रण में रख सकते हैं। उन्हे किसी अनुभवी प्रशीक्षक के मार्गदर्शन में योग करना चाहिए।

इस प्रकार अगर हम सही तरीकेसे और नियमित योगासन करते हैं तो हम हमारे शरीर और मन को संतुलित स्थिति में लाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसा करने से शरीर की अंदरूनी मरम्मत की प्रक्रिया को और भी गति मिलती हैं। अगर इसमें हम सफल हो जाते हैं तो परिणाम भी आश्चर्यजनक हो सकते हैं।

( To know more about breathing pattern and breathing rhythm please read my next blog
Positive effects of Yogasana with an emphasis on Breathing Rhythm )

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